शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012

                                                               आरज़ू

बहुत दिनों से वक़्त के अभाव के कारन मैं अपने विचारों को पंक्तियों में नहीं गढ़ पायी।निम्न कुछ पंक्तियाँ दिल की आरज़ू को बयां कर रही हैं।

उनकी आँखों में डूबकर जीया करते थे
उनके ख़यालों से महका करते थे
उनकी हंसी में ख़ुशी तलाश लिया करते थे
मिलने की  आरज़ू को उनकी गली से गुज़ार लाया करते थे
मिलता था वक़्त जब भी हमें
बीतें लम्हों की तस्वीर को रंगों से सजा लिया करते थे
सोचा न था यूँ कभी , आएगा वक़्त ऐसा भी
ज़िन्दगी मुस्कुराकर हो जाएगी दूर इतनी
वरना हम तो उनके नाम से ही बहक लिया करते थे
अगर न वो कहते कभी कि क्या है हमें ज़रूरत  उनकी
बयां कर पाते फ़िर शायद मोहब्बत की निहायत अपनी
तन्हा हुआ जब भी दिल, होटों की ख़ुशी अश्कों में बह गई
प्यार हुआ जिससे फ़िर उसकी ख़ुशी ज़िन्दगी बन गई
कई बार की कोशिश हमने उनसे दूर जाने की
पर थे  उस पल वो सामने लेकर कश्मकश का साया
एक बार फ़िर हुई कसक उनसे फांस्लें मिटाने की
दिल पर रखा हाथ जब, थम गया वो पल साँसों को जताने के लिए
मोहब्बत है हमें उनसे शायद बेंताह पर मजबूर थे हम उस वक़्त कितना
बताना तो सब चाहा मगर बाकी रह गए निशां याद आने के लिए



मंगलवार, 30 अगस्त 2011

एहसास

एक एहसास जो सबके जीवन का एक एहम पहलू है, उस एहसास से आप सबको रू ब रू करवाने के लिए मेरी  कुछ पंक्तियाँ


बारिश के इस मौसम में आँखों में क्यों गहरा पानी है
फूल हैं निखरे निखरे फिर भी तुम्हारे अक्स की ना कोई निशानी है 
मिट्टी की सौंधी खुशबू से भी क्यों रूह को है आराम नहीं
पत्ते की एक सरसराहट से भी क्यों होती दिल को परेशानी है
निगाहें खफ़ा हैं तो क्यों होती हर शाम बेगानी है
पातें हैं जिस प्यार को हर इम्तेहान से गुज़रकर
बयाँ करता है दास्ताँ वो फिर, होती सबकी वो ही कहानी है  
प्यार  से बंदिशों में भी क्यों हो जाती गुस्ताख नादानी है
आईने का अपना वजूद नहीं, करते हम क्यों फिर उसकी गुलामी है
खोया है खुद को किसी के पाने में, क्यों होता ये एहसास रूहानी है
पास हो वो तो दिल में होती है दस्तक, दूर जाने से उसके क्यों होती वक़्त को हैरानी है 
दुआ है रब से इस प्यार की जीस्त लम्बी हो, उसके रुखसार पर पलकें बिछीं हो
जैसे अंजुमन को आफताब, तूफ़ान को साहिल की तमन्ना पुरानी है



बुधवार, 9 फ़रवरी 2011

खता

ये मेरी दूसरी प्रस्तुति है जिसमें मैंने उन सब बातों का ध्यान रखने का प्रयास किया है जो मेरे मित्रों ने मुझे मेरी पहली कविता का प्रोत्साहन देते हुए कहा था. आप सब की हौंसला अफजाई की वजह से ही आज मैं आपके सम्मुख अपनी दूसरी रचना लेकर आई हूँ.

निगाहों की खता नहीं , ये तेरे चेहरे का नूर है जो उनमें बस गया 
पलकों के कोने में नींद बनकर सपनो में घुल गया

दिल की खता नहीं , ये तेरे लफ़्ज़ों का सुरूर है जो दबे एहसासों को जिंदा कर गया
धड़कन की गहराईयों में जाकर दुआ बनकर कबूल हो गया 

कहकशों की खता नहीं , ये तेरी चाहत का फ़ितूर है जो बेगाने अंजुमन को भी एक  तसव्वुर दे गया
सांसों में  उलझे  तेरे नाम  की कसक  को उस पल जिंदा सा  कर गया  

तकदीर की खता नहीं , ये खुदा  का कसूर है जो हर दिल में मोहब्बत दे गया
बहती हवा बनकर  जुड़ी पतंगों को जुदा कर गया

फासलों की खता  नहीं , ये तेरी मोहब्बत का जूनून है जो भीड़ में भी तनहाइयों का आलम कर गया 
इस पाक और बेबस दिल पर  ग़मों  की गहरी चोट कर गया

बंदिशों की खता नहीं , ये दुनिया का दस्तूर है जो हर  ख्वाब  को हकीकत से  तार्रुफ़ कर गया 
समंदर में उठे उस तूफान की तरह जो लहरों को बिखेर कर किनारे कर गया

मंगलवार, 11 जनवरी 2011

meri pehli kavita

ये कविता मेरी ज़िन्दगी में आये  उतार चढ़ाव  और  उनसे  मिली सीख  पर  आधारित  है . ये  कविता  मेरी  लिखी  गयी  पहली  कविता   है!  मुझे  इस  दिशा  की  ओर  जिसने  प्रोत्साहा  है वो   इस  कविता  में  मेरी  प्रेरणा  बनकर  मेरे  साथ  है  मैं  उनकी  सदा  शुक्रगुजार  रहूंगी , उनसे मिली  सीख  जो  मुझे  प्रेरणा  देती  है आशा है की  वो  आप  सब  को  निम्न  पंक्तियों  में   नज़र आएगी .
  

जज्बातों  पर  काबू  कर  हसकर  जीना  सीखा  है  आपसे
मुश्किलों  को  पीछे  छोड़  आगे  बढ़ना  सीखा  है  आपसे   
समंदर  में  उठे  तूफान  से  लड़कर  किनारे  पहुँचना  सीखा  है  आपसे
डूबती  नाव  न  बनकर   कश्ती को  पार  लगाना  सीखा  है  आपसे
किसी  की  ना  को  हाँ  में  बदलना  भी  सीखा  है  आपसे

गर आप  जिंदगी  में  ना  होते  तो  क्या  होता , क्यूंकि  ज़िन्दगी  के  मायने  भी   सीखे  हैं  आपसे
   

प्यार  से  हर  बात  को  कह जाना  सीखा  है  आपसे 
इस  दुनिया  में  मतलब  का  हर  रिश्ता  है , ये   भी  तो  सीखा  है  आपसे 
जो  मिलता  है  वोह  साथ  कभी  रहता  नहीं  , ये   भी   सीखा  है  आपसे 
बिन  कहे  जो  हर  बात  समझ  ले ,  ऐसे  सचाई  को  भी  पड़ना  सीखा  है  आपसे
 ख़ूबसूरत  बनने  के  लिए , ख़ूबसूरत  सोच  को  रखना  भी  सीखा  है  आपसे
  
 गर आप जिंदगी  में  ना  होते , तो  क्या  होता , क्योंकि  ज़िन्दगी  के  मायने  भी  सीखे  हैं  आपसे   
  सीख  इंसा  को  आगे  बदने  का  रास्ता  देती  है , ये ही  तो सीखा  है  आपसे
  जब मुश्किलें इंसान को झुला देती हैं ,तो सीख ही तो है जो संभालती  है ,ये सब सीखा  है  आपसे
  साया साथ छोड़ सकता है मगर सोच हरदम साथ है , ये भी तो सीखा है आपसे
  अपनी सोच पर जो काबू कर जाये  उसको  कोई  हरा  सकता  नहीं  , यह  सीखा  है  आपसे
  इतना  कुछ  सीख  कर  भी  गर  कुछ  न  पाया  जीवन  में  तो, फिर  क्या  सीखा  है  आपसे

  गर आप जिंदगी  में  ना  होते , तो क्या होता क्योंकि ज़िन्दगी  के  मायने  भी  सीखे  हैं  आपसे!